“इतिहास घायल है” [तेवरी-संग्रह] से ‘अरुण लहरी’
की तेवरियाँ
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अरुण लहरी
पूरा नाम-अरुण कुमार लहरी
जन्म-8, मई 1956, कानपुर
शिक्षा-स्नातकोत्तर ;समाज
शास्त्र
सम्प्रति-नौकरी
लेखन-कविताएं, कहानियाँ, व्यंग्य
आदि
सम्पर्क-टीकाराम बिल्ंिडग, आगरा
रोड, अलीगढ़।
;एक
तिलमिलाती जिन्दगी है, तेवरी
की बात कर।
त्रासदी ही त्रासदी है, तेवरी
की बात कर।।
जिन्दगी आतंकमय है आजकल कुछ इस तरह।
पीड़ाओं की छावनी है, तेवरी
की बात कर।।
मौन साधे बैठा है होंठ-होंठ, और अब-
आँख-आँख द्रौपदी है, तेवरी
की बात कर।।
कैसी ये विडम्बना है, बहू
उस गरीब की।
गाँव-भर की भौजी है, तेवरी
की बात कर।।
नोच-नोच खा रहा है आदमी को आदमी।
हर सू दरिन्दगी है, तेवरी
की बात कर।।
*अरुण लहरी
;दो
हम सवाल में उलझ गये हैं।
शब्द-जाल में उलझ गये हैं।।
नदियों-से व्यक्तित्व सभी के।
आज ताल में उलझ गये हैं।।
दिल को कौन पूछता यारो!
सभी खाल में उलझ गये हैं।।
विष को भूल आज नागों की।
लोग चाल में उलझ गये हैं।।
*अरुण लहरी
;तीन
इस ऐसे भी हम भटके यारो!
खत ज्यों बिना टिकट के यारो!
शब्दों के पत्थर जो उछले!
हम दर्पन-से चटके यारो!
नारे, आश्वासन के नभ में!
हम त्रिशंकु-से लटके यारो!
हर पारस-पत्थर ने हमको!
धोखे दिये विकट के यारो!
सब हैं खोटे सिक्के जितने-
देखे उलट-पलट के यारो।।
आज नहीं तो कल फूटेंगे।
इस निजाम के मटके यारो!
*अरुण लहरी
;चार
दीप आंधी में जलाकर देखिए।
आज तो कुछ खिलखिलाकर देखिए।।
पेड़ पूरा कांपता है किस तरह?
अब जड़ों को भी हिलाकर देखिए।।
इस सदी के कल्पनामय चित्र को।
अब हकीकत से मिलाकर देखिए।।
हमको छीला है गमों ने ब्लेड-सा।
आप भी कुछ तिलमिलाकर देखिए।।
दर्द की इन बस्तियों के बीच में।
आप भी तो घर बसाकर देखिए।।
*अरुण लहरी
;पाँच
तेरी खातिर भाई रे बन्दूक हुआ में जाता हूँ।
शोषक के सीने पर लक्ष्य अचूक हुआ मैं जाता हूँ।।
कैसे वध करता है देखें रामराज्य में राजा राम?
आज मित्रवर! विद्रोही शंबूक हुआ मैं जाता हूँ।।
तू बसन्त के सपने बुन ले, आँखों
में कुछ फूल खिला।
अमराई में कोयल की-सी कूक हुआ मैं जाता हूँ।।
कैसा रिश्ता जोड़ा तेरी निर्धनता ने ये मुझसे।
तेरे हाथों में रोटी का टूक हुआ में जाता हूँ।।
*अरुण लहरी
;छः
मधुमय आज मिठास कहाँ है?
अपनेपन का भास कहाँ है?
अधर प्यास में बदल गये हैं।
अब अधरों पर प्यास कहाँ है?
छल-फरेब की इस पुस्तक में।
प्यार-भरा इतिहास कहाँ है?
समझौते जीवन बन बैठे।
पर यह जीवन रास कहाँ है?
*अरुण लहरी
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